झूठ की पोल खुलने के बाद मुख्यमंत्री को करना पड़ा ट्वीट डिलीट

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को रोज़गार देने का दावा कर रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ऑफ़िस के ट्विटर हैंडल से लाभार्थियों के विडियो पोस्ट कर रोजगार देने की बात कही जा रही है । सरकार दावा कर रही है कि यूपी में बेरोज़गारी दर में बड़ी गिरावट आयी है । वहीं दूसरे तरफ प्रदेश के युवा रोज़गार के नाम पर हो- हल्ला कर रहे हैं, राजधानी स्थित इको गार्डेन में बेरोज़गार युवक धरना दे रहे हैं, सोशल मीडिया पर युवा सरकार को जमकर कोस रहे हैं।

वे हर महीने राजधानी लखनऊ में कही न कही धरना प्रदर्शन करते हैं, अधिकारियों को ज्ञापन देते हैं, अधिकारी भी उन्हें आश्वासन देते हैं कि भर्ती प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी हो जाएगी।

बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ऑफिस के ट्विटर हैंडल से दुर्गेश नामक नौजवान की एक वीडियो जाती है जिसमें युवक यूपी सरकार को धन्यवाद करते हुए कहता है. वीडियो में दिख रहा युवक लेखपाल भर्ती में चयनित होने पर यूपी सरकार का गुणगान करता दिख रहा होता है। इस वीडियो पर सोशल मीडिया पर जमकर हो हल्ला होते देख इक्कीस घंटे बाद ट्वीट डिलीट कर दिया जाता है।

बता दें कि यूपीएसएसएससी में पिछले कुछ सालों से लंबित ऐसी कई भर्तियां है, जिसमें किसी भर्ती की लिखित परीक्षा, किसी की शारीरिक परीक्षा, किसा का इंटरव्यू नहीं हुआ है। वहीं कई भर्तियों का अंतिम परिणाम आने के बाद नियुक्तियां नहीं हुई हैं। हालांकि यूपीएसएसएससी का कहना है कि कोरोना के कारण भर्ती प्रक्रियाओं की गति जरूर प्रभावित हुई थी, लेकिन प्रक्रिया अब पुनः चालू हो गई है।


सूचना के अधिकार के तहत पता चला है कि अप्रैल 2017 में भाजपा की सरकार बनने के बाद से यूपीएसएससी ने कुल 13 भर्तियां निकाली जिनमें से किसी में भी नियुक्ति नहीं दी गयी है।

देशभर के बेरोज़गार युवाओं की एक सशक्त आवाज़ ‘युवा हल्ला बोल’ ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा रोज़गार और सरकारी नौकरियों पर किए जा रहे दावों पर प्रेस काँफ़्रेस कर सवाल उठाया। मार्च 2017 में उत्तर प्रदेश की नई सरकार बनने से पहले भाजपा ने लिखित वादा किया था कि “90 दिनों के भीतर सभी रिक्त सरकारी पदों के लिए पारदर्शी तरीके से भर्ती प्रारंभ की जाएगी.” लेकिन चुनाव से पहले बड़े बड़े वादे करने वाली भाजपा ने सरकार बनने के डेढ़ साल बाद कह दिया कि युवाओं को रोजगार देने के लिए तो वो प्रतिबद्ध हैं और प्रदेश में नौकरियों की कमी भी नहीं है, लेकिन उत्तर प्रदेश के युवा नौकरी करने लायक नहीं हैं. सरकार की नाकामियां छिपाने के लिए “युवाओं की अयोग्यता” का बहाना ज़्यादा दिनों तक चल नहीं पाया।

विपक्ष भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहा है। विपक्ष का कहना है कि बेरोजगारों को सरकार रोजगार दे पाने में अक्षम साबित हो रही है, जिसके चलते प्रदेश की विकास दर घटकर लगभग 6.4 प्रतिशत रह गयी है। बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है। पिछले दो सालों में ही साढ़े बारह लाख पंजीकृत बेरोजगार बढ़े हैं।

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