बंगाल में TMC को एक और बड़ा झटका, भाजपा में शामिल हुए पूर्व राज्यसभा सांसद दिनेश त्रिवेदी

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को एक और बड़ा झटका लगा है। टीएमसी के पूर्व राज्यसभा सांसद दिनेश त्रिवेदी (Dinesh Trivedi) आज भाजपा में शामिल हो गए। दिनेश त्रिवेदी, जिन्होंने 12 फरवरी को राज्यसभा में टीएमसी सांसद के रूप में इस्तीफा दे दिया था, वह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की उपस्थिति में भाजपा में शामिल हुए।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बधाई देते हुए कहा कि मुझे बहुत खुशी हो रही है कि दिनेश त्रिवेदी जी को हम भाजपा में शामिल कर रहे हैं। मैं अपनी ओर से, अपने सभी साथियों और करोड़ों कार्यकर्ताओं की तरफ से उनका हार्दिक अभिनंन्दन और स्वागत करता हूं। दिनेश त्रिवेदी जी का राजनीतिक अनुभव लंबा रहा है और उन्होंने एक वैचारिक यात्रा राजनीति में की है।सत्ता को दरकिनार करते हुए, विचार की लड़ाई लड़ते हुए उन्होंने अपना जीवन गुजारा है। तृणमूल कांग्रेस में भ्रष्टाचार, अवसरवादिता, लोकतंत्र की हत्या, संस्थाओं का गला घोंटना, ये सब कुछ विराजमान है। इसीलिए संवेदनशील और विवेकशील व्यक्तित्व के धनी दिनेश त्रिवेदी ने तृणमूल को छोड़कर आज भाजपा को ज्वॉइन किया है।

राज्यसभा में कहा था, TMC में दम घुट रहा है

साफ है कि ममता बनर्जी को बीजेपी के साथ ही उनके ही पूर्व साथियों सो कड़ी चुनौती मिल रही है। बीजेपी की इस चुनौती का जवाब देने के लिए ही शायद ममत बनर्जी ने नंदीग्राम से ही संग्राम में उतरने का फैसला लिया है। इससे पहले वह 2011 और 2016 में भवानीपुर से जीती थीं। दिनेश त्रिवेदी उन नेताओं से रहे हैं, जो टीएमसी की स्थापना के दौर से ही ममता बनर्जी के साथ थे। दिनेश त्रिवेदी ने राज्यसभा से इस्तीफे का ऐलान करते हुए कहा था कि राज्य में हिंसा और भ्रष्टाचार का जैसा माहौल है, उसमें उनका दम घुट रहा है और वह कुछ बोलने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसे में मैंने राज्यसभा सदस्य के तौर पर इस्तीफा देने का फैसला लिया है।

इस्तीफे के बाद त्रिवेदी ने पीएम मोदी और शाह को बताया था दोस्त

राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद भी दिनेश त्रिवेदी ने बीजेपी में जाने से इनकार नहीं किया था और पीएम नरेंद्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह को अपना पुराना दोस्त बताया था। दिनेश त्रिवेदी के इस्तीफे को लेकर टीएमसी के सीनियर नेता सौगत रॉय ने उन पर हमला बोलते हुए कहा था कि वह जनाधार वाले नेता नहीं हैं और उनके जाने से किसी नए नेता को मौका मिलेगा।

जानें कैसे हुई दिनेश त्रिवेदी के सियासी सफर की शुरुआत

देश के पूर्व  रेलमंत्री रहे दिनेश त्रिवेदी ने अपने सियासी सफर की शुरुआत कांगेस से की थी। इसके बाद जनता दल से जुड़ने के बाद वह ममता बनर्जी की तृणमूल पार्टी में शामिल हो गए। दिनेश त्रिवेदी की गिनती ममता बनजी के करीबियों में की जाती थी। इसी वजह से जब यूपीए के दूसरे कार्यकाल के समय ममता बनर्जी 2011 में बंगाल के मुख्‍यमंत्री के पद पर बैठी तो उन्‍होंने रेल मंत्रालय की अहम जिम्‍मेदारी दिनेश त्रिवेदी को सौंपी।

राजनीति में आने से पहले दिनेश त्रिवेदी ने विभिन्‍न कार्यक्षेत्रों में काम किया। राजनीति में भी उन्‍हें बहुत से दलों का अनुभव मिला। त्रिवेदी से 80 के दशक में कांग्रेस का दामन थामा था और उसके बाद 90 के दशक में जनता दल में शामिल हो गए। कुछ समय जनता दल में रहने के बाद 90 के दशक के आखिर में वह ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में शामिल हो गए। जब साल 1998 में  ममता बनर्जी ने टीएमसी की शुरुआत की थी तो दिनेश त्रिवेदी टीएमसी में आ गए। उन्‍हें पार्टी में महाचिव का पद दिया गया। 1990 से 1996 तक टीएमसी में आने से पहले वह जनता दल के टिकट पर गुजरात से राज्‍यसभा के सदस्‍य भी रहे।

शिकागो में दो साल तक की नौकरी    

साल 1974 में एमबीए की डिग्री हासिल करने वाले दिनेश त्रिवेदी ने शिकागो में दो साल तक नौकरी की। उसके बाद साल 1984 में नौकरी छोड़ एक एयर फ्रंट कंपनी प्रारंभ की। इसके बाद उन्‍होंने उपभोक्‍ताओं के लिए एक प्रोटेक्‍शन सेंटर भी खोला। इसके अलावा देश में सूचना अधिकार अधिनियम आंदोलन का रास्‍ता दिखाने वाली वोहरा रिपोर्ट बनाने  में भी  त्रिवेदी ने पूरा सहयोग दिया।
 

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